किसानों को सब्सिडी पर 40,521 सोलर पंप देगी यूपी सरकार, जानें आवेदन प्रक्रिया और लाभ

उत्तर प्रदेश में खेती करने वाले किसानों के लिए सिंचाई हमेशा से सबसे बड़ा खर्च रहा है। डीजल महंगा होता जा रहा है और ग्रामीण इलाकों में बिजली की सप्लाई अनियमित है। इसी समस्या को स्थायी रूप से हल करने के लिए यूपी सरकार PM KUSUM योजना के तहत 40,521 सोलर पंप किसानों को भारी सब्सिडी पर उपलब्ध करा रही है।

यह योजना सिर्फ एक सब्सिडी स्कीम नहीं है, बल्कि खेती को बिजली संकट से आज़ाद करने की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही है।

1. PM KUSUM योजना क्या है और यूपी में इसका उद्देश्य

PM KUSUM (प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाभियान) का मकसद है

  • किसानों को ऊर्जा के मामले में आत्मनिर्भर बनाना
  • डीजल पंप की जगह सोलर आधारित सिंचाई को बढ़ावा देना
  • बिजली वितरण कंपनियों पर लोड कम करना

उत्तर प्रदेश जैसे बड़े कृषि राज्य में यह योजना इसलिए भी अहम है क्योंकि यहां लाखों किसान अभी भी डीजल पंप से सिंचाई करते हैं।

2. 40,521 सोलर पंप क्यों खास हैं

यह संख्या इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि

  • यह यूपी में अब तक के सबसे बड़े सोलर पंप वितरण अभियानों में से एक है
  • इससे हजारों गांवों में सिंचाई की समस्या स्थायी रूप से हल होगी
  • कृषि उत्पादन बढ़ने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सीधा फायदा मिलेगा

सरकार ने इन पंपों को जिले-वार कोटा के आधार पर बांटने की योजना बनाई है।

3. सोलर पंप की वास्तविक कीमत और सब्सिडी कैसे मिलती है

यहां सबसे जरूरी सवाल आता है – किसान को जेब से कितना देना होगा?

उदाहरण के तौर पर

  • 2 HP सोलर पंप की कीमत लगभग 1.6 से 1.7 लाख रुपये होती है
  • इसमें करीब 60% तक सब्सिडी मिलती है
  • किसान को सिर्फ 35–40% राशि ही देनी पड़ती है

यानी जो पंप बाजार में महंगा लगता है, वह सब्सिडी के बाद डीजल पंप से भी सस्ता पड़ता है

4. टोकन मनी क्यों ली जाती है

आवेदन के समय किसानों से लगभग ₹5,000 की टोकन राशि ली जाती है।
इसका उद्देश्य है

  • फर्जी आवेदन रोकना
  • यह सुनिश्चित करना कि केवल गंभीर किसान ही आवेदन करें

अगर किसान का चयन नहीं होता है, तो यह राशि नियमानुसार वापस की जाती है।

5. सोलर पंप से सालाना कितनी बचत होगी

एक औसत किसान जो डीजल पंप से सिंचाई करता है

  • साल में 25,000 से 40,000 रुपये तक सिर्फ डीजल पर खर्च करता है

सोलर पंप लगाने के बाद

  • ईंधन खर्च लगभग शून्य हो जाता है
  • सिर्फ मामूली मेंटेनेंस खर्च रहता है

यानि 2–3 साल में ही किसान अपनी हिस्सेदारी की रकम वसूल कर लेता है।

6. बिजली विभाग और डिस्कॉम को क्या फायदा

यह योजना सिर्फ किसानों के लिए नहीं, बल्कि

  • बिजली विभाग
  • डिस्कॉम
    के लिए भी फायदेमंद है।

सोलर पंप से

  • कृषि फीडर पर लोड घटेगा
  • ट्रांसफॉर्मर खराब होने की समस्या कम होगी
  • लाइन लॉस में कमी आएगी

यही वजह है कि सरकार इस योजना को तेजी से आगे बढ़ा रही है।

7. चयन में किन बातों को प्राथमिकता मिलती है

हालांकि चयन ई-लॉटरी से होता है, फिर भी

  • जिन किसानों के पास बिजली कनेक्शन नहीं है
  • जो डीजल पंप पर निर्भर हैं
  • जिनकी भूमि और दस्तावेज स्पष्ट हैं

उन्हें योजना का वास्तविक लाभ जल्दी मिलता है।

8. सोलर पंप लगाने के बाद किसान को क्या ध्यान रखना चाहिए

सोलर पंप लगाने के बाद

  • पैनल को छाया से दूर रखें
  • समय-समय पर सफाई करें
  • किसी भी तकनीकी खराबी पर तुरंत कंपनी या विभाग को सूचित करें

अच्छी देखरेख से सोलर पंप 20–25 साल तक काम करता है।

9. यह योजना खेती के भविष्य को कैसे बदलेगी

सोलर पंप का असर सिर्फ सिंचाई तक सीमित नहीं है।

  • समय पर पानी मिलने से फसल की गुणवत्ता सुधरेगी
  • किसान एक से ज्यादा फसल ले सकेंगे
  • खेती जोखिम भरा काम नहीं रहेगा

यही कारण है कि इसे खेती का ऊर्जा क्रांति मॉडल माना जा रहा है।

10. निष्कर्ष: क्या किसानों को इस योजना में आवेदन करना चाहिए

अगर आप

  • यूपी के किसान हैं
  • सिंचाई के लिए डीजल या महंगी बिजली पर निर्भर हैं
  • लंबे समय की बचत चाहते हैं

तो 40,521 सोलर पंप सब्सिडी योजना आपके लिए सुनहरा मौका है
यह सिर्फ एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि खेती को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में मजबूत कदम है।

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