इंडक्शन चुल्हा कितने वाट का होता है और कितनी बिजली खपत करता है?

आज के समय में गैस की बढ़ती कीमतों और सुरक्षित कुकिंग विकल्पों के कारण इंडक्शन चुल्हा तेजी से हर घर में पहुंच रहा है। लेकिन अधिकतर उपभोक्ताओं के मन में एक ही सवाल होता है कि इंडक्शन चुल्हा कितने वाट का होता है और इससे बिजली बिल कितना बढ़ता है। Bijli Didi आज इसी सवाल का पूरा, आसान और व्यावहारिक जवाब देने जा रही है।

इंडक्शन चुल्हा क्या होता है

इंडक्शन चुल्हा एक इलेक्ट्रिक कुकिंग डिवाइस है जो बिजली की मदद से बर्तन को सीधे गर्म करता है। इसमें हीट प्लेट खुद ज्यादा गर्म नहीं होती, बल्कि चुंबकीय तकनीक से बर्तन में ही गर्मी पैदा होती है। यही वजह है कि यह गैस चूल्हे से ज्यादा सुरक्षित और तेज माना जाता है।

इंडक्शन चुल्हा कितने वाट का होता है

भारत में मिलने वाले ज्यादातर घरेलू इंडक्शन चुल्हों की पावर रेंज 1200 वाट से 2200 वाट के बीच होती है।

आम तौर पर
छोटा इंडक्शन चुल्हा 1200 से 1400 वाट का होता है
मीडियम साइज इंडक्शन 1600 से 1800 वाट का होता है
हाई पावर इंडक्शन 2000 से 2200 वाट तक का होता है

यह वाट क्षमता इस बात पर निर्भर करती है कि आप किस लेवल पर कुकिंग कर रहे हैं। हर समय इंडक्शन अधिकतम वाट पर नहीं चलता।

इंडक्शन चुल्हा कितनी बिजली खपत करता है

अब बात करते हैं सबसे जरूरी सवाल की। बिजली की खपत यूनिट में मापी जाती है, जहां 1 यूनिट मतलब 1 किलोवाट घंटा।

अगर आपके पास 2000 वाट यानी 2 किलोवाट का इंडक्शन है
और आप उसे 1 घंटे तक फुल पावर पर चलाते हैं
तो खपत होगी लगभग 2 यूनिट बिजली

लेकिन वास्तविक जीवन में इंडक्शन लगातार फुल पावर पर नहीं चलता। सब्जी, दाल या चाय बनाते समय पावर अपने आप कम ज्यादा होती रहती है।

रोजमर्रा के उपयोग में बिजली खपत

मान लीजिए
आप रोज इंडक्शन पर 1 घंटा खाना बनाते हैं
औसत पावर खपत रहती है करीब 1200 से 1500 वाट

तो रोज की खपत होगी लगभग 1.2 से 1.5 यूनिट
महीने की खपत लगभग 36 से 45 यूनिट

इंडक्शन चुल्हे से महीने का बिजली बिल कितना बढ़ेगा

अगर आपके राज्य में 1 यूनिट बिजली का रेट 6 रुपये है
और इंडक्शन से 40 यूनिट बिजली खर्च होती है

तो महीने का अतिरिक्त बिल होगा लगभग 240 रुपये

यह खर्च LPG सिलेंडर की तुलना में कई मामलों में बराबर या कम भी पड़ सकता है, खासकर जब गैस की कीमतें ज्यादा हों।

इंडक्शन पर कौन से काम ज्यादा बिजली लेते हैं

इंडक्शन पर सबसे ज्यादा बिजली तब खर्च होती है जब
पानी उबाला जाता है
चावल या पास्ता पकाया जाता है
तेज आंच पर फ्राई किया जाता है

कम बिजली खर्च होती है जब
सब्जी धीमी आंच पर पकाई जाए
दाल सिम मोड पर बनाई जाए
दूध गर्म किया जाए

इंडक्शन बनाम गैस चुल्हा: बिजली और खर्च की तुलना

इंडक्शन चुल्हा ज्यादा एफिशिएंट होता है क्योंकि इसमें गर्मी सीधे बर्तन में जाती है। गैस चुल्हे में काफी ऊर्जा हवा में चली जाती है।

गैस चुल्हे में जहां 100 में से लगभग 40 से 50 प्रतिशत ऊर्जा काम आती है
वहीं इंडक्शन में 80 से 90 प्रतिशत ऊर्जा उपयोगी होती है

यही कारण है कि इंडक्शन तेज भी है और लंबे समय में किफायती भी हो सकता है।

इंडक्शन चुल्हे से बिजली कैसे बचाएं

Bijli Didi के कुछ आसान टिप्स
हमेशा फ्लैट बॉटम वाले बर्तन इस्तेमाल करें
जरूरत से ज्यादा पावर लेवल न रखें
पानी उबालने के बाद पावर कम कर दें
पकाने से पहले सब्जी काटकर रखें ताकि समय बचे
खाली बर्तन इंडक्शन पर न रखें

इन आदतों से 20 से 30 प्रतिशत तक बिजली बचाई जा सकती है।

क्या इंडक्शन चुल्हा इन्वर्टर पर चल सकता है

हां, लेकिन शर्तों के साथ।
अगर आपके पास हाई कैपेसिटी इन्वर्टर और अच्छी बैटरी है तभी इंडक्शन चलाना सही रहेगा। कम क्षमता वाले इन्वर्टर पर इंडक्शन चलाने से बैटरी जल्दी खत्म हो सकती है।

किन घरों के लिए इंडक्शन सबसे फायदेमंद है

छोटे परिवार
पीजी या किराए के घर
जहां गैस कनेक्शन उपलब्ध न हो
सुरक्षा को प्राथमिकता देने वाले घर
जहां सोलर या ऑफ पीक बिजली उपलब्ध हो

उपभोक्ताओं के लिए जरूरी सावधानी

इंडक्शन खरीदते समय सिर्फ कीमत न देखें। उसकी वाट क्षमता, वारंटी, सेफ्टी फीचर्स और बिजली खपत जरूर जांचें। BIS सर्टिफाइड प्रोडक्ट ही खरीदें।

निष्कर्ष: Bijli Didi की सलाह

इंडक्शन चुल्हा आमतौर पर 1200 से 2200 वाट का होता है और रोजमर्रा के उपयोग में यह औसतन 1 से 1.5 यूनिट प्रति घंटे बिजली खपत करता है। सही तरीके से इस्तेमाल किया जाए तो इंडक्शन चुल्हा सुरक्षित, तेज और किफायती कुकिंग विकल्प बन सकता है। अगर आप बिजली की सही समझ रखते हैं और पावर लेवल का संतुलित उपयोग करते हैं, तो इंडक्शन चुल्हा आपके बिजली बिल पर भारी नहीं पड़ेगा, बल्कि गैस खर्च में राहत जरूर देगा।

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