कड़ाके की ठंड ने राजधानी दिल्ली में आम लोगों की दिनचर्या के साथ-साथ बिजली की खपत को भी बुरी तरह प्रभावित किया है। जनवरी की शुरुआत में दिल्ली में बिजली की मांग ने सर्दियों का अब तक का सबसे बड़ा रिकॉर्ड बना लिया। ठंड बढ़ने के साथ ही घरों, दफ्तरों और व्यावसायिक क्षेत्रों में इलेक्ट्रिक हीटर, ब्लोअर और गीजर का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है, जिसका सीधा असर पावर डिमांड पर पड़ा है।
5603 मेगावॉट: सर्दियों का सबसे ऊंचा पावर लोड
आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक जनवरी के पहले सप्ताह में दिल्ली की अधिकतम बिजली मांग करीब 5603 मेगावॉट तक पहुंच गई। यह इस सर्दी के मौसम का अब तक का सबसे ऊंचा स्तर है। इसके बाद के दिनों में भी पावर डिमांड 5500 मेगावॉट के आसपास बनी रही, जिससे साफ है कि ठंड का असर बिजली खपत पर लगातार बना हुआ है।
अचानक क्यों बढ़ गई बिजली की खपत?
दिल्ली में बिजली की मांग बढ़ने के पीछे कई वजहें सामने आई हैं। सबसे बड़ा कारण सर्दी का तेज होना है। जैसे-जैसे तापमान गिरा, वैसे-वैसे लोगों ने इलेक्ट्रिक हीटिंग उपकरणों पर निर्भरता बढ़ा दी।
हीटर और ब्लोअर की बढ़ी डिमांड
सर्दी के दिनों में रूम हीटर और ब्लोअर सबसे ज्यादा बिजली खपत करने वाले उपकरणों में शामिल हैं। ये उपकरण कम समय में ज्यादा यूनिट खर्च करते हैं। कई घरों में एक से ज्यादा हीटर एक साथ चल रहे हैं, जिससे घरेलू बिजली लोड काफी बढ़ गया है।
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गीजर का ज्यादा इस्तेमाल
ठंड के मौसम में गीजर का इस्तेमाल लगभग हर घर में सुबह और शाम होता है। कई जगहों पर गीजर लंबे समय तक चालू रहने से बिजली खपत कई गुना बढ़ जाती है। यही कारण है कि सर्दियों में घरेलू बिजली बिल अक्सर बढ़े हुए नजर आते हैं।
नए साल और छुट्टियों का असर
नए साल की छुट्टियों के दौरान होटल, मॉल, बाजार और रेस्टोरेंट देर रात तक खुले रहे। रोशनी, हीटिंग और अन्य इलेक्ट्रिक उपकरणों की वजह से कमर्शियल क्षेत्रों में भी बिजली की खपत में इजाफा हुआ, जिसने कुल पावर डिमांड को और ऊपर धकेल दिया।
क्या बिजली आपूर्ति प्रभावित हुई?
रिकॉर्ड स्तर की मांग के बावजूद दिल्ली में बिजली आपूर्ति को लेकर कोई बड़ी समस्या सामने नहीं आई। वितरण कंपनियों और ग्रिड प्रबंधन एजेंसियों का कहना है कि उन्होंने पहले से तैयारी कर रखी थी। अतिरिक्त बिजली की व्यवस्था, पावर एक्सचेंज से खरीद और बेहतर लोड मैनेजमेंट के कारण उपभोक्ताओं को निर्बाध सप्लाई मिला
पिछले वर्षों से तुलना
अगर पिछले कुछ सालों के आंकड़ों पर नजर डालें तो साफ दिखाई देता है कि दिल्ली में सर्दियों के दौरान बिजली की मांग लगातार बढ़ रही है। पहले जहां सर्दियों में अधिकतम मांग 4800 से 5000 मेगावॉट के बीच रहती थी, अब यह आंकड़ा 5600 मेगावॉट को पार कर चुका है। यह बदलाव बढ़ती आबादी, शहरीकरण और इलेक्ट्रिक उपकरणों की बढ़ती संख्या का नतीजा है।
क्या 6000 मेगावॉट तक जा सकती है मांग?
ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि अगर आने वाले दिनों में तापमान और गिरता है, तो दिल्ली की बिजली मांग 6000 मेगावॉट के करीब भी पहुंच सकती है। हालांकि, डिस्कॉम कंपनियां दावा कर रही हैं कि वे इस स्तर की मांग को संभालने के लिए तैयार हैं।
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उपभोक्ताओं पर क्या असर पड़ेगा?
बिजली की बढ़ती मांग का सीधा असर आम उपभोक्ताओं पर पड़ता है।
पहला असर बिजली बिल के रूप में दिखता है। हीटर और गीजर जैसे उपकरण ज्यादा यूनिट खपत करते हैं, जिससे महीने के अंत में बिल बढ़ सकता है।
दूसरा असर ओवरलोड और फॉल्ट के खतरे के रूप में सामने आता है। एक साथ कई हाई-पावर उपकरण चलाने से घरेलू वायरिंग पर दबाव बढ़ता है, जिससे फ्यूज उड़ने, एमसीबी ट्रिप होने या शॉर्ट सर्किट की आशंका रहती है।
बिजली बचत के लिए जरूरी सुझाव
उपभोक्ताओं को चाहिए कि वे सर्दियों में बिजली का इस्तेमाल समझदारी से करें।
- हीटर का इस्तेमाल सीमित समय के लिए करें और कमरे को जरूरत से ज्यादा गर्म न रखें।
- गीजर को लगातार चालू न रखें और थर्मोस्टेट का सही इस्तेमाल करें।
- रात में सोते समय हीटर बंद कर दें।
- एक साथ कई हाई-लोड उपकरण चलाने से बचें।
- ऊर्जा-कुशल उपकरण और एलईडी लाइट का इस्तेमाल करें।
सरकार और डिस्कॉम की भूमिका
बढ़ती बिजली मांग को देखते हुए सरकार और वितरण कंपनियां लगातार हालात पर नजर बनाए हुए हैं। ग्रिड की निगरानी, अतिरिक्त बिजली खरीद और ट्रांसमिशन सिस्टम को मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है, ताकि किसी भी स्थिति में बिजली आपूर्ति बाधित न हो।
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क्या यह भविष्य का संकेत है?
विशेषज्ञ मानते हैं कि यह रिकॉर्ड सिर्फ एक खबर नहीं, बल्कि आने वाले समय की चेतावनी है। जैसे-जैसे शहरों में इलेक्ट्रिक उपकरण बढ़ेंगे, वैसे-वैसे बिजली की मांग भी नए रिकॉर्ड बनाएगी। ऐसे में ऊर्जा संरक्षण और जिम्मेदार उपभोग बेहद जरूरी हो