आज के समय में इंडक्शन चूल्हा तेजी से भारतीय रसोई का हिस्सा बनता जा रहा है। इसकी सबसे बड़ी वजह है तेज़ पकाने की क्षमता, साफ-सफाई में आसानी और गैस की तुलना में बेहतर नियंत्रण। सरकार की इलेक्ट्रिक कुकिंग और डिजिटल इंडिया जैसी सोच के चलते भी लोग गैस से बिजली की ओर शिफ्ट हो रहे हैं।
लेकिन हर उपभोक्ता के मन में एक सीधा सवाल होता है
इंडक्शन चूल्हा 1 घंटे में कितनी बिजली खाता है?
Bijli Didi आज इसी सवाल का पूरा, व्यावहारिक और आसान जवाब देने वाली है।
इंडक्शन चूल्हा कितने वॉट का होता है?
भारत में आमतौर पर मिलने वाले इंडक्शन चूल्हों की पावर इस प्रकार होती है
कम पावर मॉडल: 1200 वॉट
मीडियम पावर मॉडल: 1600 से 1800 वॉट
हाई पावर मॉडल: 2000 से 2200 वॉट
अधिकतर घरों में 1800 वॉट का इंडक्शन चूल्हा ही इस्तेमाल होता है, क्योंकि यह रोज़मर्रा की कुकिंग के लिए संतुलित माना जाता है।
वॉट से यूनिट कैसे निकाली जाती है?
यह समझना बहुत ज़रूरी है क्योंकि बिजली का बिल यूनिट में आता है।
1 यूनिट बिजली = 1000 वॉट को 1 घंटे तक इस्तेमाल करना
फॉर्मूला
वॉट ÷ 1000 = यूनिट प्रति घंटा
अब इसी आधार पर इंडक्शन चूल्हे की खपत समझते हैं।
इंडक्शन चूल्हा 1 घंटे में कितनी बिजली खाता है?
अगर आपका इंडक्शन चूल्हा 1800 वॉट का है
1800 वॉट ÷ 1000 = 1.8 यूनिट
यानि
इंडक्शन चूल्हा 1 घंटे में लगभग 1.8 यूनिट बिजली खाता है
अब अलग-अलग पावर पर देख लेते हैं
1200 वॉट इंडक्शन = 1.2 यूनिट प्रति घंटा
1600 वॉट इंडक्शन = 1.6 यूनिट प्रति घंटा
2000 वॉट इंडक्शन = 2.0 यूनिट प्रति घंटा
यह अधिकतम खपत होती है, जब इंडक्शन लगातार फुल पावर पर चलता है।
क्या इंडक्शन हर समय फुल पावर पर चलता है?
यह बहुत अहम बात है जो ज़्यादातर लोग नहीं जानते।
इंडक्शन चूल्हा लगातार 1800 या 2000 वॉट पर नहीं चलता।
यह ऑटोमैटिक ऑन-ऑफ मोड में काम करता है।
उदाहरण के लिए
जब पानी उबल जाता है या सब्ज़ी पकने लगती है, तो इंडक्शन खुद पावर कम कर देता है।
इसका मतलब
रियल लाइफ में इंडक्शन की खपत 1.2 से 1.5 यूनिट प्रति घंटा के आसपास रहती है।
रोज़ाना इस्तेमाल पर कितना बिजली बिल बढ़ेगा?
मान लीजिए
आप रोज़ 1 घंटे इंडक्शन चूल्हा चलाते हैं
औसत खपत = 1.5 यूनिट
महीने की खपत
1.5 × 30 = 45 यूनिट
अगर आपके राज्य में 1 यूनिट का रेट 6 रुपये है
45 × 6 = 270 रुपये महीना
यानि
इंडक्शन चूल्हे से महीने में लगभग 250 से 300 रुपये का बिजली खर्च आता है।
इंडक्शन चूल्हा बनाम गैस चूल्हा
यह तुलना हर उपभोक्ता के लिए जरूरी है।
इंडक्शन चूल्हा
बिजली पर चलता है
तेज़ कुकिंग
किचन में गर्मी कम
बिल सीधा दिखाई देता है
गैस चूल्हा
LPG सिलेंडर पर निर्भर
गैस की कीमत बढ़ती रहती है
गर्मी और धुआं ज़्यादा
रीफिल का झंझट
आज के रेट में देखें तो इंडक्शन और गैस का खर्च लगभग बराबर बैठता है, लेकिन इंडक्शन ज्यादा साफ और सुरक्षित विकल्प बनता जा रहा है।
किन बातों पर इंडक्शन की बिजली खपत निर्भर करती है?
इंडक्शन चूल्हे की खपत इन बातों से बदलती है
आप किस पावर लेवल पर कुक कर रहे हैं
बर्तन का साइज और क्वालिटी
खाना पकाने का समय
इंडक्शन की स्टार रेटिंग
वोल्टेज की स्थिरता
अगर बर्तन सही नहीं है तो इंडक्शन ज्यादा बिजली लेता है।
इंडक्शन चूल्हे से बिजली कैसे बचाएं?
Bijli Didi के आसान और काम के टिप्स
हमेशा फ्लैट बॉटम इंडक्शन बर्तन इस्तेमाल करें
फुल पावर की बजाय मीडियम मोड में पकाएं
ढक्कन लगाकर खाना बनाएं
बार-बार ऑन ऑफ न करें
जरूरत से ज्यादा देर इंडक्शन न चलाएं
इन तरीकों से आप 20 से 30 प्रतिशत तक बिजली बचा सकते हैं।
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क्या इंडक्शन चूल्हा सुरक्षित है?
हां, पूरी तरह सुरक्षित है अगर
अच्छी वायरिंग हो
अलग सॉकेट का इस्तेमाल हो
एक्सटेंशन बोर्ड से बचें
गीले हाथों से न छुएं
Bijli Didi हमेशा कहती है
बिजली सुविधा है, लेकिन सावधानी ज़रूरी है।
इंडक्शन चूल्हा किन घरों के लिए सही है?
छोटे परिवार
PG और किराए के मकान
गैस कनेक्शन न होने पर
सोलर बिजली वाले घर
शहरों के अपार्टमेंट
अगर आपके यहां बिजली सप्लाई ठीक है तो इंडक्शन एक बेहतरीन विकल्प है।
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निष्कर्ष
इंडक्शन चूल्हा 1 घंटे में औसतन 1.2 से 1.8 यूनिट बिजली खाता है।
रियल लाइफ उपयोग में यह खर्च ज्यादा नहीं होता और सही तरीके से इस्तेमाल करने पर बिजली बिल कंट्रोल में रहता है।
आज के समय में इंडक्शन चूल्हा सिर्फ एक किचन उपकरण नहीं, बल्कि स्मार्ट और जागरूक उपभोक्ता की पहचान बनता जा रहा है।
Bijli Didi यही सलाह देती है
जानकारी के साथ इस्तेमाल करें, तभी बिजली भी बचेगी और पैसा भी।
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