अक्सर लोगों के मन में एक सवाल आता है की आखिर ई-रिक्शा कितनी बिजली खपत करता है ? क्या यह सच में उतना ही सस्ता है जितना लोग बताते है ? और अगर हाँ तो एक बार चार्ज करने पर यह कितनी दूरी तय करता है और कितना खर्च आता है ?
शहरों और कस्बों की सड़कों पर आजकल आपको आसानी से ई-रिक्शा चलते हुए देखें होंगे | यह पेट्रोल और डीजल की जगह बिजली से चलता है | यह सस्ता,किफायती और प्रदुषण-रहित होने की वजह से यात्रिओं के लिए बहतरीन विकल्प बन चूका है |
यह सभी सवालों के जवाब जानने के लिए हमें इसके बैटरी पैक,चार्जिंग क्षमता और वास्तविक बिजली खपत को समझना होगा | इस ब्लॉग पोस्ट में हम विस्तार से समझेंगे की ई-रिक्शा को चार्ज करने में कितनी यूनिट बिजली लगता है, एक दिन या एक महीने में यह कितना खर्च आता है |

ई-रिक्शा की पावर रेटिंग क्या है?
ई-रिक्शा की पॉवर रेटिंग उसके मोटर और बैटरी पैक पर निर्भर करती है | आमतौर पर ई-रिक्शा में 650 वाट से 1500 वाट तक की मोटर लगी होती है | भारत में ज्यादातर ई-रिक्शा 1000 वाट क्षमता की मोटर से चलते है | यह पॉवर इतनी होती है की ई-रिक्शा आसानी से 4-6 यात्रियों को लेकर 25-30 किलोमीटर/घंटा की गति से चल सकें |
मोटर की पावर रेटिंग जितनी अधिक होगी, ई-रिक्शा की खींचने की क्षमता और स्पीड उतनी ही बेहतर होगी | लेकिन इसके साथ ही बिजली खपत भी थोड़ी ज्यादा हो जाएगी | उदाहरण के लिए 650 वाट मोटर वाला ई-रिक्शा हलके लोड और छोटे शहरों के उपयुक्त है | जबकि 1200 वाट या 1500 वाट वाला ई-रिक्शा ज्यादा लोड उठाने और लम्बी दूरी तय करने में बेहतर होता है |
सरकार द्वारा निर्धारित मानकों के अनुसार ई-रिक्शा की अधिकतम पावर रेटिंग 2000 वाट से ज्यादा नहीं होनी चाहिए | इसका उद्देश्य यह है की वाहन सुरक्षित रहे ,ज्यादा बिजली खर्च न करें और बैटरी पर अनावश्यक लोड न पड़े | इस तरह हम कह सकते है की नार्मल ई-रिक्शा की पॉवर रेटिंग 650 वाट से 1500 वाट के बीच होती है | जो कि रोजमर्रा की सवारी के लिए पर्याप्त है |
ई-रिक्शा का चार्जर कितने वाट का होता है?
ई-रिक्शा को चार्ज करने के लिए इस्तेमाल होने वाला चार्जर आमतौर 600 वाट से 1500 वाट तक की क्षमता का होता है | सबसे सामान्य रूप से बाज़ार में मिलने वाला चार्जर लगभग 1000 वाट के होते है | इन चार्जर की हेल्प से ई-रिक्शा की बैटरी 8 से 10 घंटें में पूरी तरह चार्ज हो जाती है |
चार्जर की पावर रेटिंग बैटरी के वोल्टेज और क्षमता पर निर्भर करती है | उदाहरण के लिए, यदि ई-रिक्शा में 48v की बैटरी लगी है,तो उसका चार्जर 48v आउटपुट और लगभग 15 से 20A करंट देने में सक्षम होता है | इसी तरह 60v बैटरी वाले ई-रिक्शा में 60v आउटपुट वाला चार्जर लगाया जाता है | वाटेज की गणना वोल्टेज और करंट के गुणन से की जाती है |
अगर चार्जर की क्षमता ज्यादा है (जैसे 1500w) तो बैटरी तेजी से चार्ज होगी, लेकिन इसके साथ ही बैटरी पर अधिक दबाब भी पड़ेगा | वही कम वाट वाला चार्जर (600-800w) बैटरी को धीरे-धीरे चार्ज करता है, जिससे बैटरी की लाइफ लम्बी रहती है | इसलिए अधिकांश निर्माता और ड्राईवर संतुलन बनाने के लिए 1000w चार्जर का उपयोग करते है |
ई-रिक्शा चार्जिंग में कितनी यूनिट बिजली लगती है?
ई-रिक्शा आमतौर पर 48w या 60w बैटरी पर चलता है | अगर हम सबसे नार्मल मॉडल लें तो इसमे 48v,100Ah की बैटरी लगी होती है | इसकी कुल बैटरी कैपेसिटी = 48*100 =4800 Wh यानि 4.8 KWh होती है | इसका मतलब है की बैटरी को फुल चार्ज करने लिए लगभग 5 यूनिट बिजली की जरुरत पड़ती है |
चार्जिंग प्रक्रिया में 100% एफिशिएंसी नहीं होती है | चार्जिंग और बैटरी में लगभग 10-15% तक लौस हो जाता है | इसलिए अगर बैटरी 4.8 यूनिट बिजली स्टोर करती है तो चार्जिंग बिजली मीटर में खपत लगभग 5.2 से 5.5 यूनिट तक दर्ज होगी | यही वजह है की ई-रिक्शा को फुल चार्ज में लगभग 5-6 यूनिट बिजली खर्च करनी पड़ती है |
इस तरह से देखा जाए तो ई-रिक्शा रोजाना चलाने के लिए ज्यादा बिजली की जरूरत नहीं होती है । अगर कोई ड्राइवर दिन में एक बार बैटरी फुल चार्ज करता है तो उसे प्रतिदिन पांच या छह यूनिट बिजली चाहिए | महीने भर में यह खपत लगभग 150-180 यूनिट तक हो जाता है । इससे चार्जिंग का खर्च केवल रु.1000 से रु.1200 तक आता है ।
ई-रिक्शा को चार्ज करने में कितना समय लगता है?
ई रिक्शा की चार्जिंग का समय उसकी बैटरी की क्षमता और चार्जर की पॉवर रेटिंग पर निर्भर करता है । नॉर्मली ई रिक्शा में 4.8v, 100Ah की बैटरी लगी होती है जिसकी क्षमता 100 Ah से 1200 Ah तक होती है । अगर हम 48v,100 Ah बैटरी का उदाहरण ले तो इसकी क्षमता लगभग 4.8 KWh होती है । इसे पूरी तरह चार्ज करने में सामान्य चार्जर को 8-10 घंटे लगते हैं ।
अगर ई रिक्शा का चार्जर 1000 वाट का है तो यह बैटरी को लगा 8 घंटे में फूल चार्ज कर देता है | वही अगर 1500 वाट का है और तेज रफ्तार इस्तेमाल किया जाए तो चार्जिंग का समय घटकर पांच से छह घंटे रह जाता है । लेकिन ध्यान देने वाला बात यह है कि तेज चार बैटरी पर बर्बाद डालते हैं, जिससे बैटरी की लाइफ थोड़ी कम हो जाती है ।
इसलिए अधिकतर ड्राइवर और निर्माता एस्ट्रैंडर्ड चार्जर का ही इस्तेमाल करते हैं । यह बैटरी को धीरे धीरे और सुरक्षित तरीके से चार्ज करता है । जिससे बैटरी की उमर लंबी रहती है | लेकिन लोग ई-रिक्शा को रात भर चार्ज पर लगा कर रखा जाता है। और वह सुबह तक पूरी तरह फुल चार्ज हो जाता है ।
ई-रिक्शा की बैटरी की लाइफ कितनी होती है?
ई-रिक्शा में आमतौर पर लेड-एसिड या लिथियम-आयन बैट्रिक इस्तेमाल की जाती है । लेड-एसिड बैटरी सस्ती होती है और 1 साल से ज्यदा चलती है जबकि लिथियम-आयन बैटरी महंगा होता है और उसकी उम्र लगभग 3 से 5 साल तक होती है । यानी बैटरी की लाइफ काफी हद तक उसके प्रकार पर निर्भर करती है ।
बैटरी की लाइफ चार्जिंग साइकिल पर आधारित होती है | एक लेड-एसिड बैटरी लगभग 300-400 चार्जिंग साइकिल तक चलती है | जबकी लिथियम-आयन बैटरी 1000-1500 चार्जिंग साइकिल तक टिक सकती है | इसका मतलब है की यदि रोज बैटरी को चार्ज करते है तो लेड-एसिड बैटरी 12-18 महीने में बदलनी पड़ सकती है जबकि लिथियम-आयन बैटरी 3-4 साल तक अच्छी परफॉरमेंस देती है |
बैटरी की असली उम्र ड्राइविंग स्टाइल,लोड,चार्जिंग आदत और मेंटेनेंस पर भी निर्भर करती है | समय पर पानी भरना,ओवरचार्जिंग से बचना और सही चार्जर का उपयोग करना बैटरी की लाइफ को बढाता है | इसलिए एक ड्राइवर अगर बैटरी की सही देखभाल करें तो वह अपनी बैटरी से अधिकतम फायदा ले सकता है और उसे बार-बार बदलने की जरुरत नहीं पड़ती |
निष्कर्ष
ई-रिक्शा आज के समय में परिवहन का एक बेहतरीन साधन बन चूका है | ई-रिक्शा के बैटरी को चार्ज करने में लगभग 5-6 यूनिट बिजली लगती है और यह एक बार चार्ज पर औसतन 80-100 किमी तक चल सकता है | चार्जिंग का खर्च बहुत कम आने के कारण यह पेट्रोल या डीजल वाले रिक्शों की तुलना में कहीं ज्यादा किफायती है |
ई-रिक्शा की बैटरी की उम्र 1.5 साल से लेकर 5 साल तक हो सकती है जो बैटरी और देखभाल पर निर्भर करती है और चार्जिंग में 6-10 घंटे लगते है | इसका मतलब यह हुआ की यह वाहन न केवल कम खर्च में यात्रिओं को सेवा देता है बल्कि ड्राइवरों क्र लिए बेहतर मुनाफे का जरिया बनता है |
कुल मिलाकर, ई-रिक्शा बिजली की खपत में बेहद किफायती है और आने वाले समय में यह पब्लिक ट्रांसपोर्ट का और भी महत्वपूर्ण हिस्सा बनने वाला है | अगर सही बैटरी,उचित चार्जिंग और नियमित देखभाल की जाए तो यह वाहन लंबे समय तक बिना ज्यादा खर्च के आराम से चलाया जा सकता है |